जब कोई भीड़ में भी तन्हा हो जाता है
हर नज़र उसकी नज़रों को टटोलती
कि क्या उनके दिल मे है
और मन ही मन हम खुश हो जाते
आख़िर मे उनका एक कदम बढाना
मेरे दिल का धड़कना, आरजू का जगना
जैसे जुगनू की चमक वैसे आपकी कनक
इन नज़रों के खेल मे
कभी मेरा हारना तो कभी उनका
पर इस हार मे भी मजा है
मैं तन्हा ही कहीं चले जा रहा हूँ
उसकी मुस्कराहट को दिल में सहेजे
यादो के दामन में खो जाता हूँ
जब मैं भीड़ मे तन्हा होता हूँ
अपने आप को उसकी यादो के साथ पाता हूँ
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